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Wed. Feb 4th, 2026

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खेलने की उम्र मे कुरान शुरु करने पर छात्र को सम्मानित किया

महराजगंज। खेलने खाने की उम्र मे कुरान शरीफ की शुरुआत करने मदरसे के छात्र को मौलाना ने सम्मानित किया जिससे घर वालों के खुशी का ठिकाना नही रहा। ग्राम सभा मुजहना बुजुर्ग वार्ड संख्या दो नगर पालिका परिषद महराजगंज के मदरसे मे पढ़ने वाले छात्र मोहम्मद फहद को मौलाना मोहम्मद एजाज हुसैन अमजदी ने वृहस्पतिवार को कुरान शरीफ की शुरुआत करायी। इस अवसर पर मदरसे मे पढ़ने वाले छात्र मोहम्मद फहद को माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। मोहम्मद फहद के पिता मोहम्मद मुख़्तार ने बताया पांच वर्ष की उम्र मे बच्चो का दाखिला किया जाता उसके बाद बच्चे को कायदा, अम्मापारा, अलिफ़ लाम मीम पढ़ने के बाद ही कुरान शरीफ की शुरुआत की जाती है लेकिन मोहम्मद फहद ने कम उम्र मे यह उपलब्धि हासिल कर माता पिता का नाम रोशन किया।

वायरल फीवर में कारगर है होम्योपैथी दवाएँ :- डा हेमन्त श्रीवास्तव

महराजगंज। अचानक से होने वाले मौसम के बदलाव की वजह से लोग वायरल फीवर के चपेट में तेज़ी से आ रहे हैं , तेज़ बुख़ार बार-बार ठंड लगना, कंपकंपी या कंपन होना
थकान और कमज़ोरी या थकावट
सिरदर्द ,गले में खराश ,बहती नाक , मांसपेशियों में दर्द ,पसीना आना ,भूख न लगना उल्टी, दस्त जैसी समस्या सामान्य रूप से देखा जा रहा है ,वायरल संक्रमण शरीर के किसी भी हिस्से, आंतों, फेफड़ों, वायुमार्ग आदि में हो सकता है। संक्रमण के परिणामस्वरूप बुखार होगा।वायरल बुखार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है। जब संक्रमित व्यक्ति जम्हाई लेता है, छींकता है, खांसता है या बात भी करता है, तो उसके शरीर से तरल पदार्थ के छोटे-छोटे छींटे निकलते हैं जो आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं यदि आप आस-पास हैं। एक बार जब वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर जाता है, तो आपके शरीर में बुखार के साथ एक पूर्ण रूप से भयंकर संक्रमण में बदलने में 16 घंटे से 48 घंटे तक का समय लगता है। वरिष्ठ होम्योपैथ चिकित्सक डा हेमन्त श्रीवास्तव बताते हैं ,होम्योपैथी में सभी बुखारों के इलाज की बहुत अच्छी गुंजाइश है। होम्योपैथी बुखार की समग्रता और बीमारी की तस्वीर को ध्यान में रखती है। यह व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक बनावट को ध्यान में रखती है और प्रत्येक व्यक्ति का अलग-अलग इलाज करती है। आर्सेनिकम एल्बम, इन्फ्लुएंजिनम, बेलाडोना, ब्रायोनिया, जेल्सीमियम, रस टॉक्स, यूपेटोरियम पर्फ आदि जैसी दवाएं वायरल बुखार के साथ-साथ वायरल के बाद की खांसी को भी बिना किसी परेशानी के पूरी तरह से ठीक करने में मदद कर सकती हैं। साथ ही बचाव के लिए बाहर का या सड़क किनारे का खाना न खाएं-पीएं ,अपने आप को हाइड्रेटेड रखें ,तरल पदार्थ पिएं और विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ खाएं,तरल आहार और हल्का आहार लें जिसमें भरपूर मात्रा में फल शामिल हों ,पर्याप्त आराम आवश्यक है।

मानवीय मूल्यों को खोजती शेर-ओ-शायरी की पुस्तक “हसरतें”

एक इंसान जब दुनिया को ख़ूबसूरत बनाने के ख़्वाब देखता है तो उसके अंदर कई ज़िंदगियाँ और दुनियाएँ जमा हो जाती हैं। इंसान बनने के इस सफ़र में शायरी और दर्दमंदी बहुत काम आती है। अपने आस-पास की छोटी-छोटी चीज़ों से मुतअस्सिर होना, फूलों, पौधों और बच्चों की खिलखिलाहट देख कर ख़ुश होना, किसी को उदास देख कर दु:खी होना, ये सब सिफ़ात अगर किसी इंसान में आ जाती हैं तो वो इंसानियत के आला-तरीन मक़ाम पर फ़ाएज़ होता है।

राकेश सूद ने क्या ख़ूब कहा है

नज़र कमज़ोर हो जाए तो कोई ग़म नहीं

नज़रिया इंसान का मज़बूत होना चाहिए

बिलकुल ये आम बात है कि किसी इंसान की नज़र कमज़ोर हो जाए तो ये कोई बहुत बड़ा दुःख नहीं होगा बल्कि एक छोटा नुक़सान समझा जा सकता है, लेकिन अगर किसी का नज़रिया जो इंसानियत की आधारभूत संरचना से जुड़ा हो तो ये एक बड़ा ख़सारा समझा जाएगा और इस शेर में बड़ी उम्दगी और सच्चाई से सादा अल्फ़ाज़ में वो अपना मुद्दआ बयान कर जाते हैं जो उनकी शेर की समझ की बहुत ख़ूबसूरत नज़ीर है।

जब आदमी किसी मैदान में नया होता है और पहली बार किसी महफ़िल में शामिल होता है और बिल-ख़ुसूस जब वो महफ़िल हुस्न वालों यानी अहल-ए-नज़र की हो तो कितनी शर्म आती है अपनी कम-इल्मी पर कि मैं कुछ भी नहीं जानता और यहाँ तो सब नज़र रखते हैं, तब वो आहिस्ता-आहिस्ता, ज़ीना दर ज़ीना, अल्फ़ाज़ को तोल-तोल कर, झिझकते हुए कलाम करता है लेकिन आख़िरकार उस कैफ़-ओ-सुरूर का लुत्फ़ उठा ही लेता है जिसे हुस्न वालों ने आगही की मय से ताबीर किया है। क्या अंदाज़ है, क्या तर्ज़-ए-बयान है साहब!

आपका शेर —

ज़िंदगी जीने का अलग दस्तूर है मेरा

निभाए सब से रिश्ते यही क़ुसूर है मेरा

ज़फ़ाओं के बदले में वफ़ाऐं की हैं मैंने

ख़ुदग़र्ज़ समझते हैं यही क़ुसूर है मेरा

और आप फरमाते हैं

अपनों से कभी मैं ख़फ़ा नहीं होता

लाख करें दुखी मैं बेवफ़ा नहीं होता

ये भी उसी क़बील का शेर है जो हिंदुस्तानी कल्चर की मिसाल अपने आप में है। यानी हम उन तमाम क़दरों को निभाएँगे जिन्हें हमारे बड़ों ने हम तक मुंतक़िल किया था, कि अपने अगर आपके साथ अच्छा सुलूक न भी करें, मुसलसल आपके जी को चोट पहुँचाएँ, चूंकि वो अपने हैं तो उनसे बेज़ार होने का तो कोई सवाल ही नहीं पैदा होता बल्कि मैं साथ ही रहूँगा और वो भी इस तौर कि उनके दुःखी करने पर यक्साँ बर्ताव भी नहीं करूँगा। उनकी पहली किताब ‘हिदायतें’ के नाम से शाए हुई थी। इस नाम से ही ज़ाहिर होता है कि राकेश सूद आने वाली नस्लों और भारतवासियों के लिए कोई पैग़ाम दे रहे हैं। उनकी इस दूसरी किताब डायमण्ड बुक्स द्वारा प्रकाशित बुक “हसरतें” है।

मैं जब दुनिया और उसके भेदों पर ग़ौर करता हूँ तो समझ में आता है कि जब तक शायरी मौजूद है, नेक-दिल लोग आते रहेंगे, और जब तक नेक-दिल लोग आते रहेंगे तब तक दुनिया की सुंदरता बरक़रार रहेगी। राकेश सूद भी इसी सूची में आते हैं। उनकी शायरी पढ़ जाइये, मोहब्बत और हमदर्दी के अलावा दूसरा कोई संकेत नहीं मिलता। इस मोहब्बत के अनेक रंग उनकी शायरी में फूटते हैं, कहीं देश प्रेम, कहीं सारी दुनिया के इंसान, कहीं महबूब से वस्ल की शदीद इच्छा। ये सारे जज़्बात राकेश सूद को अंदर से बहुत मासूम बनाते हैं और यही उनकी शायरी की ताक़त है।

श्री राकेश सूद की पुस्तक “हसरतें” एक मौलिक, अनूठा व महान प्रयास है। इसका मूल-सार, समस्त- सामग्री  व रूप-सज्जा जन साधारण और जन-मानस के प्रश्नों से जूझ रहा है। हमारे प्यारे मुल्क हिंदुस्तान की मौजूदा सूरत-ए-हाल देख कर शायर का जी कुढ़ता है और वो सामाजिक अफ़रा-तफ़री पर प्रगतिवादी और शायराना चोट करते हैं। ये तो उनकी रचनात्मक हुनरमंदी की बातें हुईं।

डायमण्ड बुक्स के चेयरमैन नरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कीराकेश सूद ‘रश्क’ न केवल एक उम्दा शायर हैं। हम 50 वर्षों से उनकी शायरी के प्यासे हैं। जब किसी महफ़िल में मिलते हैं तो उनसे एक-दो शेर सुनकर दिल खुश हो जाता है। मुशायरों में उनकी वाह वाह सुनाई देती है और शायरी को दोबारा सुनना चाहते हैं। उनकी शायरी का एतराम करते हैं। उम्मीद करता हूँ कि राकेश सूद अपना पैग़ाम देने में कामयाब रहेंगे।

चाहे जितने भी वादे करने हैं कर ले मेरे सनम

चेहरे के तेरे हाव-भाव कुछ और बयाँ करते हैं।

होली के बीच चंद्र ग्रहण शुरू, गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान

कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान कई प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा निकलती है, जिसका प्रभाव संपूर्ण ब्रह्मांड पर पड़ता है, इसलिए इस साल होली पर चंद्र ग्रहण का लगना शुभ नहीं माना जा रहा है। ऐसे में चलिए जानते हैं 25 मार्च यानी आज होली वाले दिन चंद्र ग्रहण कब लगेगा और रंगों के त्योहार पर इसका क्या प्रभाव होगा। 

चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान

  • गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान सुई, चाकू, कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं से दूर रहना चाहिए।
  • चंद्र ग्रहण के सूतक काल से लेकर ग्रहण के समापन तक गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव पल रहे बच्चे पर पड़ता है।
  • साथ ही गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण भी नहीं देखना चाहिए। इससे उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
  • चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को हनुमान चालीसा या दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से सभी संकट और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।
  • साथ ही इस समय अपने इष्टदेव का स्मरण करना भी शुभ होता है। वहीं चंद्र ग्रहण के समापन के बाद स्नान करें और फिर साफ वस्त्र पहनें।

चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

होली के दिन लगने वाला साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, इसलिए इसका प्रभाव भी यहां पर नहीं होगा। लेकिन ज्योतिष में चंद्र ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है इसलिए इससे बचने के लिए कुछ उपाय भी जरूर करने चाहिए।   

  • चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण के दौरान गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। कहा जाता है कि इस दौरान गुरु ग्रह के बीज मंत्र ‘ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:’ का जाप फलदायी होता है।
  • इसके अलावा चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप किया जा सकता है। 

चंद्र ग्रहण पर मंदिर के द्वार क्यों होते हैं बंद? 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से कुछ विशेष नियम जुड़े हुए हैं। इन मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय पूजा-पाठ करना, भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित माना जाता है। इसीलिए इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। वहीं घर में मौजूद पूजा स्थल पर परदे लगा दिए जाते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है और दैवीय शक्तियां क्षीण होने लगती हैं। इसीलिए इस दौरान मानसिक जाप करना उचित होता है। जिससे आप मानसिक रूप से सशक्त रह सकें। 

व्यास तहखाने में जारी रहेगा पूजा-पाठ, हाईकोर्ट का फैसला

वाराणसी। वाराणसी स्थित ज्ञानवापी के व्यास तहखाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया है कि यहां पूजा-पाठ जारी रहेगा. बता दें कि नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ करने का अधिकार देने की मांग को लेकर स्वयंभू विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओर से पंडित सोमनाथ व्यास, डा. रामरंग शर्मा एवं अन्य द्वारा 15 अक्टूबर 1991 को दाखिल मुकदमे की सुनवाई जिला जज की अदालत में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र सोमवार को सुनवाई हुई। 

भावना आहत करने का आरोप लगाते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर वकील हरिशंकर पांडेय की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर अपर जिला जज (नवम) की अदालत सुनवाई हुई. ज्ञानवापी में कब्रों का जिक्र करते हुए उर्स, चादर, गागर समेत अन्य धार्मिक कार्यों की अनुमति देने की मांग को लेकर लोहता के रहने वाले मुख्तार अहमद व अन्य की ओर से दाखिल वाद पर एडीजे सातवां की अदालत में सुनवाई हुई।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, कि आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया की दोनों याचिकाओं को खारिज कर दी है, इसका मतलब है कि जो पूजा चल रही थी वह वैसे ही चलती रहेगी. अगर वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे तो हम भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखेंगे।

आर के इंटरमीडिएट कालेज की छात्रा निशा गुप्ता का इंस्पायर अवार्ड के लिए हुआ चयन

हरपुर तिवारी/महराजगंज। परतावल विकास खण्ड ग्रामीण क्षेत्र में स्थित आर के इंटरमीडिएट कॉलेज लक्ष्मीपुर, हरपुर चौक महाराजगंज की कक्षा 10वी की छात्रा निशा गुप्ता का चयन इंस्पायर अवार्ड के लिए हुआ है। जिसके लिए छात्रा को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा दस हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान हो चुकी है साथ ही छात्रा को नवप्रवर्तन के लिए प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि के महाराजगंज के इंस्पायर अवार्ड नोडल अधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा कमी नहीं है जरूरत है सही समय पर सही जवाब निकालने की इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बाल विज्ञान संचालक रोहित कुमार गुप्ता विद्यालय परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सही विद्या का सही जगह उपयोग करना बहुत जरूरी है इसके अतिरिक्त समय-समय पर बच्चों को शिक्षा के अतिरिक्त अन्य कार्य प्रॉपर्टी जागरूक करना चाहिए । विद्यालय के प्रधानाचार्य इरफानुल्लाह खान महाराजगंज के इंस्पायर अवार्ड के पूरी टीम का आभार प्रकट करते कहा कि बाल विज्ञान को बढ़ावा और नवप्रवर्तन में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंस्पायर अवार्ड योजना से बच्चों में वैज्ञानिक चिंतन एवं शिक्षा के क्षेत्र में विकास होता है ऐसी योजनाओं का लाभ सभी विद्यार्थियों को लेना चाहिए ।इस उपलब्धि के लिए विद्यालय के सभी अध्यापकों व छात्रा को बहुत बहुत बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। व विद्यालय वरिष्ठ अध्यापक दीपक कुमार, जितेंद्र गौड़, समसुज्जमा, महबूब अली अध्यापिकाओं में सरोज कन्नौजिया, रेखा सिंह, रजनी कसौधन, खुशनमा खातून व पूरे विद्यालयों परिवार को धन्यवाद देते हुए कहा ऐसे योजनाओं के प्रति सभी बच्चों को जागरूक करने की उचित निर्देश दिए।

यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा 2023 रद्द: जानें दोबारा फिर से कब होगा एग्जाम

लखनऊ। हाल में आयोजित हुए यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा को पेपर लीक होने की खबरों के बाद रद्द कर दी गई है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, छह माह के अंदर ही पूर्ण शुचिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि युवाओं की मेहनत और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार पर हैं। 

उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दशा में बख्शे नहीं जाएंगे। ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते 17 और 18 फरवरी को आयोजित पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 को रद्द करते हुए अगले छह माह के अंदर पूरी शुचिता के साथ दोबारा परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उक्त परीक्षा के संबंध में जारी एसटीएफ की जांच और अब तक की कार्रवाई की समीक्षा करते हुए शनिवार को मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया।